राजीव दवे
कपड़ा नगरी पाली, जहां रंगाई-छपाई का कार्य सालों पहले घरों से शुरू हुआ और पॉवर प्रोसेस तक पहुंचा। इस दौर तक आने में पीढि़यां बदली, अब युवाओं की नई सोच के साथ यह उद्योग करवट ले रहा है। परम्परागत साड़ी को छोड़कर युवा उद्यमी गारमेंटिंग की तरफ बढ़ गए हैं। जिले व प्रदेश के बाहर के बजाय स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण मिटाने में नवचार ला रहे हैं। नए उद्यमियों की नई सोच व समझ का असर यह है कि पाली में बनने वाले सूट आज सूरत सहित देश के अन्य भागों में बनने वाले गारमेंट को टक्कर दे रहे हैं। वे नाम से बिक रहे है। ये बदलाव स्टार्टअप की चाह रखने वालों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहे हैं।