फाइनेंस बिल को मनी बिल भी कहा जाता है. ये संविधान के आर्टिकल 110 के अंतर्गत आता है. दरअसल, सरकार जब भी टैक्सेशन में बड़े बदलाव करती है तो वो इसी इंस्ट्रूमेंट के जरिए करती है यानी कि फाइनेंस बिल के जरिए बदलाव होता है. अगर सरकार को नया टैक्स लगाना है तो वो फाइनेंस बिल में दर्ज करेंगे. अगर किसी तरह का टैक्स खारिज करना है या फिर टैक्सेशन स्लैब में किसी तरह का बदलाव करना है तो वो सब फाइनेंस बिल में ही आएगी.